Somvati Amavasya on 2 December 2013 सोमवती अमावस्या

दिनाकं 2-12-2013 को सोमवती अमावस्या है यह दिन  पित्र दोष , काल सर्प दोष की शांति के लिए बहुत ही शुभ दिन है।

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। ये वर्ष में लगभग एक ही बार पड़ती है। इस अमावस्या का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है।

इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधान पूर्वक तुलसी के पेड़ को चढ़ाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।

इस  दिन रद्राभिषेक कराना चाहिए। नाग के जोड़े चांदी या सोने में बनवाकर उन्हें बहते पानी में प्रवाहित कर दें। सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस दोष में कमी होती है . या फिर प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा वस्त्र भेंट करने से पितृ दोष कम होता है . शनिवार के दिन पीपल की जड़ में गंगा जल, काले  तिल चढ़ाये । पीपल और बरगद के वृ्क्ष की पूजा करने से पितृ दोष की शान्ति होती है।

किसी भी शिव मंदिर में सोमवती अमावस्या या नाग पंचमी के दिन ही काल सर्प दोष की शांति करनी चाहिए।  काल के स्वामी महादेव शिव जी है सिर्फ शिव जी है जो इस योग से मुक्ति दिला सकते है क्योंकि नाग जाति के गुरु महादेव शिव हैं। शास्त्रो में जो उपाय बताए गये हैं उनके अनुसार जातक किसी भी मंत्र का जप करना चाहे, तो निम्न मंत्रों में से किसी भी मंत्र का जप-पाठ आदि कर सकता है।
१- ऊँ नम शिवाय मंत्र का  जप करना चाहिए और शिवलिंग के उपर गंगा जल, काले  तिल चढ़ाये ।
२ – महामृत्युंजय मंत्र का जप करना परम फलदायी है।

3 -नव नाग स्तुति  का पाठ करें

अनंतं वासुकिं शेषंपद्म नाभं च कम्बलं।

शंख पालं धृत राष्ट्रं तक्षकं कालियंतथा॥

एतानि नव नामानि नागानां चमहात्मनां।

सायं काले पठेन्नित्यं प्रातः कालेविशेषतः॥

तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयीभवेत्॥

जिनकी कुंडली में शनि ग्रह के कारण चंद्रमा कमजोर हो रहा है या साढ़ेसती चल रही हो और वह मानसिक विकारों से दिन-प्रतिदिन ग्रस्त होते जा रहे हों, वे सोमवती अमावस्या पर दूध, चावल, खीर, चांदी, फल, मिष्ठान और वस्त्र इत्यादि अपने पितरों के निमित्त पिंडदान करवाकर इतना पुण्य प्राप्त कर सकते है, जिससे उनकी कुंडली में जरूरी ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक रूप धारण कर लेगी।

सोमवती अमावस्या पर स्त्रिया अपने सुहाग की रक्षा और आयु की वृद्धि के लिए पीपल की पूजा करती हैं। पीपल के वृक्ष को स्पर्श करने मात्र से पापों का क्षय हो जाता है और परिक्रमा  करने से आयु बढ़ती है और व्यक्ति मानसिक तनाव से मुक्त हो जाता है। अमावस्या के पर्व पर अपने पितरों के निमित्त पीपल का वृक्ष लगाने से सुख-सौभाग्य, संतान, पुत्र, धन की प्राप्ति होती है और पारिवारिक क्लेश समाप्त हो जाते हैं।

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Posted on December 1, 2013, in Uncategorized. Bookmark the permalink. 1 Comment.

  1. Ram Ram Guru Ji. Kaisen hain aap?

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